HDFC Bank ने 17 अक्टूबर 2026 को वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी किए। बैंक का standalone शुद्ध लाभ ₹19,510 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही के ₹18,641 करोड़ से लगभग 4.7 प्रतिशत अधिक है। नतीजों के बाद Bernstein, JPMorgan, Citi और Jefferies जैसे बड़े ब्रोकरेज ने बैंक पर सकारात्मक रुख बनाए रखा, लेकिन JPMorgan और Citi ने अपने टारगेट प्राइस घटा दिए हैं।
Q2 में मुनाफा कितना बढ़ा
Q2 FY27 में HDFC Bank का standalone net profit ₹19,509.96 करोड़ रहा। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह आंकड़ा ₹18,641.28 करोड़ था। इस हिसाब से मुनाफे में लगभग 4.7 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई। मुनाफे की ग्रोथ धीमी दिखने का एक बड़ा कारण ट्रेजरी ट्रेडिंग गेन में आई गिरावट है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रेजरी गेन शामिल करने पर मुनाफा 4.7 प्रतिशत बढ़ा, लेकिन इन गेन को हटाकर देखने पर ग्रोथ 12.6 प्रतिशत बताई गई है। यानी बैंक की मुख्य कमाई की गति दिखाए गए मुनाफे की गति से अधिक रही।
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ब्याज आय में मजबूती
इस तिमाही में HDFC Bank का net interest income, यानी NII, ₹34,620 करोड़ रहा। पिछले साल की इसी तिमाही में NII ₹31,550 करोड़ था। इस तरह ब्याज आय में लगभग 9.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।
NII बैंक की मुख्य कमाई को दिखाने वाला आंकड़ा है। यह बताता है कि बैंक ने लोन और अन्य interest-earning assets से कितनी कमाई की तथा depositors को कितना ब्याज दिया। HDFC Bank के नतीजों में NII का बढ़ना यह दिखाता है कि बैंक की मुख्य बैंकिंग कमाई मजबूत बनी हुई है।
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मार्जिन में 10 bps की गिरावट
Q2 FY27 में बैंक का net interest margin, यानी NIM, कुल assets पर 3.16 प्रतिशत रहा। पिछली तिमाही में यह 3.26 प्रतिशत था। इस तरह NIM में 10 basis points की गिरावट आई।
रिपोर्ट्स में बताया गया है कि FCNR(B) deposits के आने से private banks के margins पर दबाव पड़ा है। HDFC Bank के मामले में भी यही कारण margin में गिरावट के पीछे बताया गया है। आगे की तिमाहियों में NIM की दिशा बैंक की कमाई के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।
लोन ग्रोथ और प्रोविजन का असर
Q2 FY27 में HDFC Bank की loan growth लगभग 16 प्रतिशत बताई गई है। यह बताता है कि बैंक की lending activity तेज बनी हुई है। हालांकि, इस तिमाही में बैंक की provisions ₹3,574 करोड़ रहीं। यह पिछले साल की इसी तिमाही की ₹3,500 करोड़ और पिछली तिमाही की ₹3,059 करोड़ से अधिक थीं। provisions में बढ़ोतरी का असर मुनाफे पर पड़ा। बैंक की earnings presentation के अनुसार, Q2 में return on assets यानी RoA 1.78 प्रतिशत और return on equity यानी RoE 13.5 प्रतिशत रहा। standalone EPS ₹12.7 रहा।
JPMorgan और Citi ने घटाया टारगेट
Q2 नतीजों के बाद JPMorgan ने HDFC Bank पर Overweight रेटिंग बरकरार रखी, लेकिन टारगेट प्राइस ₹990 से घटाकर ₹970 कर दिया। Citi ने Buy रेटिंग बनाए रखते हुए टारगेट ₹970 से घटाकर ₹880 कर दिया। इसका मतलब यह है कि दोनों ब्रोकरेज बैंक के लंबी अवधि के कारोबार पर आशावादी हैं, लेकिन उन्हें margin pressure और execution से जुड़ी चुनौतियां दिख रही हैं। टारगेट में कटौती का मतलब यह नहीं है कि रेटिंग नेगेटिव हो गई है।
Bernstein और Jefferies का रुख
Bernstein ने HDFC Bank पर Outperform रेटिंग के साथ ₹1,150 का टारगेट प्राइस बरकरार रखा है। यह टारगेट नतीजों के बाद की कीमत से लगभग 58 प्रतिशत अपसाइड बताया गया है।
Jefferies ने भी Buy रेटिंग और ₹880 टारगेट बरकरार रखा। इस तरह चारों ब्रोकरेज का रुख सकारात्मक है, लेकिन उनके टारगेट में बड़ा अंतर है। Bernstein सबसे बुलिश है, जबकि Citi और Jefferies का टारगेट ₹880 है।
शेयर पर नतीजों का असर
Q2 नतीजे आने के बाद 19 अक्टूबर 2026 को HDFC Bank का शेयर शुरुआती कारोबार में लगभग 2 प्रतिशत तक गिरा। BSE पर शेयर ₹715 तक आया। शेयर में गिरावट के बावजूद कुछ analysts ने कहा है कि बैंक के लिए सबसे बुरा समय बीत चुका है और अब नए CEO पर नजर रखी जा रही है। यह analysts का मत है, न कि कोई पक्का नतीजा।
मैनेजमेंट में बड़ा बदलाव
नतीजों के साथ ही एक और महत्वपूर्ण खबर सामने आई। Reuters के अनुसार, HDFC Bank के Deputy Managing Director Kaizad Bharucha पद छोड़ेंगे। यह खबर बैंक के नतीजों के दिन ही सामने आई और इसे लीडरशिप से जुड़ा महत्वपूर्ण अपडेट माना जा रहा है। निवेशकों के लिए मैनेजमेंट में बदलाव महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इससे बैंक की रणनीति, loan growth और execution पर असर पड़ सकता है। अगली तिमाहियों में नई लीडरशिप की दिशा और बैंक की margin recovery पर ध्यान देना होगा।
आगे की स्ट्रेटजी क्या हो सकती है
HDFC Bank के अगले नतीजों में NIM की वापसी, loan growth की रफ्तार, provisions का स्तर और नई लीडरशिप के तहत execution देखने वाली चीजें होंगी। इस तिमाही में बैंक की NII और loan growth मजबूत रही, लेकिन NIM में गिरावट और provisions में बढ़ोतरी ने मुनाफे की ग्रोथ को धीमा किया।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह न मानें। शेयर बाजार में निवेश से पहले अपना शोध करें या SEBI-registered investment adviser से सलाह लें।





