गुजरात अल्कलीज एंड केमिकल्स लिमिटेड के Stock में पिछले कुछ दिनों से जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। सोमवार के कारोबार में स्टॉक इंट्रा-डे में करीब 9% उछलकर लगभग 586.35 रुपये के स्तर तक पहुंच गया, जबकि उसी समय BSE सेंसेक्स करीब 2.5% गिरावट में था। कमजोर बाजार में भी इस तरह की तेजी ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
4 दिन में 41% रिटर्न का सफर
ताजा डेटा के मुताबिक, पिछले 4 ट्रेडिंग सेशंस में गुजरात अल्कलीज का शेयर लगभग 41% तक चढ़ चुका है। 17 मार्च 2025 को यह स्टॉक करीब 414.45 रुपये के स्तर पर था, जहां से इसमें तेज रिबाउंड देखने को मिला है। 16 मार्च 2025 को शेयर ने 52 हफ्ते का लो तकरीबन 410 रुपये छुआ था, यानी हालिया लो से यह करीब 43% ऊपर आ चुका है। इस उछाल के साथ छोटे अवधि के निवेशकों को तगड़ा रिटर्न मिला है।
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ट्रेडिंग वॉल्यूम और मार्केट एक्शन
तेजी के साथ ही शेयर में ट्रेडिंग वॉल्यूम भी काफी बढ़ गया है। एनएसई और बीएसई दोनों एक्सचेंज मिलाकर करीब 3.37 करोड़ शेयरों का लेन-देन हुआ, जो कंपनी की कुल इक्विटी का लगभग 46% हिस्सा है। औसत से तीन गुना से ज्यादा वॉल्यूम यह दिखाता है कि बाजार में शेयर को लेकर जबरदस्त एक्शन और खरीदारी की होड़ रही। कई सेशंस में स्टॉक ने सेक्टर और broader मार्केट दोनों को आउटपरफॉर्म किया है।
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तेजी की असली वजह क्या है?
इस तेज रैली के पीछे सबसे अहम कारण प्रमोटर की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी को माना जा रहा है। गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स (GNFC) ने 18 से 20 मार्च 2026 के बीच ओपन मार्केट से 7.34 लाख के आसपास शेयर खरीदे, जो कुल इक्विटी का करीब 1% है। इस डील पर लगभग 35.85 करोड़ रुपये खर्च किए गए और इसके बाद GNFC की हिस्सेदारी 2.4% से बढ़कर लगभग 3.4% हो गई। प्रमोटर की यह आक्रामक खरीदारी बाजार में पॉजिटिव सिग्नल के तौर पर देखी जा रही है, जो निवेशकों के भरोसे को मजबूत कर रही है।
कंपनी का बिजनेस और फंडामेंटल तस्वीर
गुजरात अल्कलीज देश की केमिकल इंडस्ट्री की प्रमुख कंपनियों में से एक है और कॉस्टिक सोडा, क्लोरीन, हाइड्रोजन पेरॉक्साइड, फॉस्फोरिक एसिड और एल्युमिनियम क्लोराइड जैसे कई प्रोडक्ट बनाती है। इन केमिकल्स का इस्तेमाल टेक्सटाइल, पेपर, डिटर्जेंट, प्लास्टिक, फार्मा, वॉटर ट्रीटमेंट और एग्रीकल्चर जैसे कई सेक्टर्स में होता है, जिससे कंपनी को डाइवर्स डिमांड बेस मिलता है। कंपनी में गुजरात सरकार और अन्य सरकारी उपक्रमों की मजबूत हिस्सेदारी है, कुल मिलाकर सरकारी प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी लगभग 46% के आसपास मानी जाती है। हाल के महीनों में केमिकल सेक्टर पर मार्जिन प्रेशर और कमज़ोर क्वार्टरली रिजल्ट्स की वजह से स्टॉक 52 हफ्ते के लो तक फिसला था, लेकिन प्रमोटर बाइंग के बाद अब इसमें शॉर्ट टर्म रिकवरी देखी जा रही है।
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश, ट्रेडिंग या चिकित्सा सलाह नहीं माना जाए। शेयर बाज़ार में निवेश जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए फैसला लेने से पहले अपने रजिस्टर्ड फाइनेंशियल एडवाइज़र से परामर्श अवश्य करें।






