शेयर बाजार में 1 अप्रैल 2026 से Futures & Options (F&O) सेगमेंट में आठ नए शेयर शामिल किए जा रहे हैं, जिससे ट्रेडर्स के लिए नए अवसर बनेंगे और इन स्टॉक्स में वोलैटिलिटी भी बढ़ सकती है। F&O में निवेशक भविष्य की तारीख के लिए तय कीमत पर खरीद या बिक्री का सौदा करते हैं और कम पूंजी में लीवरेज के साथ ट्रेड कर पाते हैं।
कौन–कौन से 8 शेयर शामिल हुए
इस बार जिन शेयरों को F&O सेगमेंट में जोड़ा गया है, उनमें Adani Power Limited, Cochin Shipyard Limited, Force Motors Limited, Hyundai Motor India Limited, Motilal Oswal Financial Services Limited, Nippon Life India Asset Management Limited, Vishal Mega Mart Limited और Godfrey Phillips India Limited शामिल हैं। खास बात यह है कि इस रिव्यू में किसी भी पुराने शेयर को F&O से बाहर नहीं किया गया है, यानी मौजूदा लिस्ट के साथ सीधे ये आठ नए नाम जुड़ रहे हैं।
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SEBI के नियम और चयन की शर्तें
Securities and Exchange Board of India (SEBI) के नियमों के अनुसार किसी भी स्टॉक को F&O में शामिल करने के लिए उसका नाम एवरेज मार्केट कैप और एवरेज डेली ट्रेडिंग वैल्यू के आधार पर टॉप 500 शेयरों में होना जरूरी है। इसके साथ ही रोजाना डिलीवरी वैल्यू कम से कम 35 करोड़ रुपये, मार्केट वाइड पोजिशन लिमिट (MWPL) कम से कम 1,500 करोड़ रुपये और MQSOS कम से कम 75 लाख रुपये होना चाहिए, वरना समय–समय पर रिव्यू के दौरान स्टॉक को F&O से बाहर भी किया जा सकता है।
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इन स्टॉक्स की ताजा कीमत और मूवमेंट
Adani Power का शेयर करीब 150.50 रुपये पर हल्की गिरावट के साथ ट्रेड हो रहा है और यह प्राइवेट सेक्टर की सबसे बड़ी थर्मल पावर कंपनियों में गिना जाता है। Cochin Shipyard लगभग 1,194 रुपये, Force Motors करीब 19,403 रुपये, Hyundai Motor India लगभग 1,778 रुपये, Motilal Oswal Financial Services लगभग 632 रुपये, Nippon Life India AMC करीब 804 रुपये, Vishal Mega Mart लगभग 105 रुपये और Godfrey Phillips India करीब 1,873 रुपये के आसपास कारोबार कर रहे हैं, और ज्यादातर में हाल ही में कमजोरी या हल्की गिरावट दर्ज की गई है।
F&O में शामिल होने के मुख्य फायदे
किसी भी शेयर के F&O में आने के बाद उसकी लिक्विडिटी आम तौर पर बढ़ जाती है, जिससे बड़े और छोटे दोनों तरह के ट्रेडर्स के लिए खरीद–बिक्री आसान हो जाती है। इसके साथ ही प्राइस डिस्कवरी बेहतर होती है, वॉल्यूम और भागीदारी बढ़ती है और संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी भी तेज हो सकती है, हालांकि शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी बढ़ने से तेज उतार–चढ़ाव देखने को मिल सकता है जो एक्टिव ट्रेडर्स के लिए नए अवसर पैदा करता है।
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश, ट्रेडिंग या चिकित्सा सलाह नहीं माना जाए। शेयर बाज़ार में निवेश जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए फैसला लेने से पहले अपने रजिस्टर्ड फाइनेंशियल एडवाइज़र से परामर्श अवश्य करें।






